प्राचार्य का संदेश
प्रिय अभिभावकों एवं शिक्षकों,
बच्चे हमारे समाज का दर्पण हैं और उनका समग्र विकास इस बात पर निर्भर करता है कि हम उन्हें कैसा वातावरण प्रदान करते हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के दूरदर्शी 5+3+3+4 पाठ्यचर्या ढाँचे के अंतर्गत हमारा विद्यालय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु चार महत्वपूर्ण चरणों में शिक्षण-अधिगम की प्रक्रिया संचालित करता है। फाउंडेशन स्टेज में खेल-आधारित गतिविधियों के माध्यम से बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN) विकसित किया जाता है। प्रिपरेटरी स्टेज में भाषा एवं गणितीय दक्षताओं को सुदृढ़ किया जाता है, जबकि मिडल स्टेज में अनुभवात्मक अधिगम (Experiential Learning) के माध्यम से जिज्ञासा, अन्वेषण और अवधारणात्मक समझ को प्रोत्साहित किया जाता है। सेकेंडरी स्टेज में आलोचनात्मक चिंतन, सृजनात्मकता, समस्या-समाधान क्षमता तथा जीवनोपयोगी कौशलों के विकास पर विशेष बल दिया जाता है।
इस शैक्षिक यात्रा में शिक्षकों की भूमिका केवल पाठ्यक्रम पूर्ण करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे प्रत्येक विद्यार्थी की विशिष्ट सीखने की गति और क्षमता का सम्मान करते हुए उसके मार्गदर्शक एवं प्रेरणास्रोत बनते हैं। वे विद्यार्थियों को केवल जानकारी प्राप्त करना नहीं, बल्कि सोचने, समझने, प्रश्न करने और नवाचार करने की कला सिखाते हैं। दूसरी ओर, अभिभावक बच्चों के प्रथम शिक्षक एवं सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी होते हैं। घर पर सकारात्मक संवाद, प्रेरणादायी वातावरण तथा विद्यालय के साथ सतत समन्वय बच्चों के शैक्षणिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) के बदलते परिप्रेक्ष्य में आइए हम सभी मिलकर शिक्षा को एक साझा उत्तरदायित्व के रूप में स्वीकार करें। शिक्षक और अभिभावक के संयुक्त प्रयासों से हम पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 3, भोपाल के प्रत्येक विद्यार्थी को भारतीय संस्कृति एवं मूल्यों से समृद्ध, आधुनिक ज्ञान एवं तकनीकी दक्षताओं से सुसज्जित तथा आत्मविश्वासी, संवेदनशील और उत्तरदायी नागरिक के रूप में विकसित कर सकते हैं।
“आइए, हम सब मिलकर प्रत्येक बच्चे को सीखने, बढ़ने और उत्कृष्टता प्राप्त करने के अवसर प्रदान करें, ताकि वह अपने उज्ज्वल एवं समृद्ध भविष्य का निर्माण कर सके।”
सादर शुभकामनाओं सहित,
प्राचार्य